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प्रेम कोई मौसमी चीज़ नहीं

                
                                                         
                            प्रेम कोई मौसमी चीज़ नहीं
                                                                 
                            

प्रेम कोई मौसमी चीज़ नहीं,
कि मौसम आएगा तो फल लग जाएगा।
प्रेम तो एक पौधा है,
जिसे सींचना पड़ता है,
समझना पड़ता है,
सीखना पड़ता है,
और अपने कर्मों से अर्जित करना पड़ता है।

प्रेम की राह में
बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है,
कई बार अपने अहंकार की,
कई बार अपनी इच्छाओं की
कुर्बानी देनी पड़ती है।

और इतना सब करने के बाद भी
यदि सच्चा प्रेम मिल जाए,
तो समझो तुम खुशनसीब हो।

क्योंकि प्रेम
इतनी मामूली बात नहीं,
कि हर किसी को मिल जाए—
प्रेम तो वह दौलत है,
जिसे पाने के लिए
इंसान को पहले
खुद प्रेम के योग्य बनना पड़ता है।

- रजनी
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3 घंटे पहले

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