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नज़रों से नज़र मिलाकर

                
                                                         
                            नज़रों से नज़र मिलाकर
                                                                 
                            

ऐसा जीवन जीने की कोशिश करो,
कि अपना फ़ोन, अपनी कहानी,
अपना चेहरा न छिपाना पड़े।

नज़रें मिलाने लायक रहो,
कि किसी से नज़र मिलाकर
बात कर सको—
यही तो सच्चे जीवन की उपलब्धि है।

तुम्हारा ख़ाता देखने
कोई नहीं आएगा,
मगर तुम्हारा व्यवहार
हर किसी को दिखाई देगा।

इसलिए दुनिया से पहले
ख़ुद से नज़र मिलानी है,
समाज तो बाद की बात है—
ज़िंदगी की असली जीत यही है,
कि आईने में खड़े होकर भी
नज़रें झुकानी न पड़ें।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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