मेरा संघर्ष, मेरी पहचान
मैं अपने चरित्र पर
इसलिए गर्व करती हूँ,
क्योंकि ज़िंदगी में बहुत कुछ सहकर भी
खुद को गलत रास्ते पर
नहीं जाने दिया मैंने।
समय ने मुझे
बार-बार तोड़ा,
लोगों ने मुझे
कमज़ोर समझा,
लेकिन मैंने हर बार
खुद को पहले से
और मज़बूत बनाया।
आज मैं अकेली खड़ी हूँ,
मगर अपने फैसलों के साथ,
अपने आत्मसम्मान के साथ
सीना तानकर खड़ी हूँ।
मेरे अपने ही
साँप-बिच्छुओं के समान हैं,
इनसे दूर रहना ही बेहतर है,
क्योंकि कुछ ज़ख़्म
दुश्मन नहीं,
अपने ही दे जाते हैं।
अब दोबारा मरना नहीं मुझे,
न किसी के सामने झुकना है,
न किसी को अपनी कीमत
साबित करनी है।
जिसने मुझे तोड़ा,
उसका शुक्रिया—
उसी ने मुझे
खुद से मिलाया है।
अब मेरी ख़ामोशी कमजोरी नहीं,
मेरी ताक़त है,
और मेरा संघर्ष ही
मेरी पहचान है।
— रजनी
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