हे ख़ुदा, तेरा शुक्रिया
हे ख़ुदा, तेरा शुक्रिया कैसे करूँ,
मेरे पास तुझे कहने को शब्द ही नहीं हैं।
तूने आज फिर दिखा दिया,
कि सच्चाई की राह पर चलने वाले को
एक दिन अपनी महिमा दिखा ही देता है।
तू कमज़ोर का हमेशा होता है,
बस दिखाई थोड़ी देर से देता है।
सच्चे इंसान को तू उसकी औकात से भी ज़्यादा देता है,
और बेईमान का छीना हुआ भी वापस ले लेता है,
बस उसे इसका एहसास तक नहीं होने देता।
आज जो मिला है,
उसे अपनी जीत नहीं,
तेरी कृपा मानती हूँ।
हे ख़ुदा,
शब्द कम पड़ गए हैं मेरे—
बस दिल से इतना ही कह सकती हूँ...
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