आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक वक्त के बाद

                
                                                         
                            एक वक्त के बाद
                                                                 
                            

एक वक्त के बाद कुछ अच्छा नहीं लगता,
न बुरा लगता है,
बस दिल हर एहसास से दूर हो जाता है।

एक वक्त के बाद
आँसू भी बेअसर हो जाते हैं,
और मुस्कुराहट भी सिर्फ़ एक आदत रह जाती है।

जिस बात पर कभी रातें जागकर गुज़री थीं,
वही बात फिर मामूली लगती है।

शायद वक्त सब कुछ नहीं बदलता,
बस इंसान को इतना बदल देता है
कि फिर कुछ भी पहले जैसा असर नहीं करता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर