धोखों का ज्ञान
कोई बात नहीं ऐ ज़िंदगी,
तू बड़े-बड़े धोखे न देती,
तो मैं बड़े-बड़े अनुभवों से
कहाँ गुजर पाती।
तूने मेरे बड़े-बड़े भरोसे तोड़े,
तो बदले में बड़ा ज्ञान दे दिया,
जो किताबें न सिखा सकीं,
वो तेरे धोखों ने सिखा दिया।
इतना गहरा ज्ञान
बिना टूटे मिलना मुमकिन ही न था,
बिना अपनों से ठोकर खाए
ये समझ आना संभव ही न था।
अब शिकायत नहीं तुझसे,
तेरे हर धोखे का शुक्रिया—
तूने जो छीना, उससे कहीं ज्यादा
समझने की ताकत दे दी।
— रजनी
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