आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

धोखों का ज्ञान

                
                                                         
                            धोखों का ज्ञान
                                                                 
                            

कोई बात नहीं ऐ ज़िंदगी,
तू बड़े-बड़े धोखे न देती,
तो मैं बड़े-बड़े अनुभवों से
कहाँ गुजर पाती।

तूने मेरे बड़े-बड़े भरोसे तोड़े,
तो बदले में बड़ा ज्ञान दे दिया,
जो किताबें न सिखा सकीं,
वो तेरे धोखों ने सिखा दिया।

इतना गहरा ज्ञान
बिना टूटे मिलना मुमकिन ही न था,
बिना अपनों से ठोकर खाए
ये समझ आना संभव ही न था।

अब शिकायत नहीं तुझसे,
तेरे हर धोखे का शुक्रिया—
तूने जो छीना, उससे कहीं ज्यादा
समझने की ताकत दे दी।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
20 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर