अभी तूफ़ान बाकी है
तू सोचता होगा कुछ यूँ ही अपने मन में,
अब नहीं रही कोई प्यास मेरे तन में।
यह भी सोचता होगा—
मुझे पाने की आग भी बुझ गई होगी,
चाहत मेरी कहीं थम गई होगी।
तुझे पता नहीं,
अभी तो धुआँ उठा है मेरे मन में,
अभी तो चाहत का तूफ़ान बाकी है।
तूने समझ लिया होगा सब ख़त्म हो गया,
मगर मेरे भीतर अभी अरमान बाकी है।
तू क्या जाने मेरे दिल की गहराई,
अभी तो ख़्वाहिशों की रात बाकी है,
अभी तो तेरे तन में भी
मेरे होने की एक चाह बाकी है।
— रजनी
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