आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अभी तूफ़ान बाकी है

                
                                                         
                            अभी तूफ़ान बाकी है
                                                                 
                            

तू सोचता होगा कुछ यूँ ही अपने मन में,
अब नहीं रही कोई प्यास मेरे तन में।
यह भी सोचता होगा—
मुझे पाने की आग भी बुझ गई होगी,
चाहत मेरी कहीं थम गई होगी।

तुझे पता नहीं,
अभी तो धुआँ उठा है मेरे मन में,
अभी तो चाहत का तूफ़ान बाकी है।
तूने समझ लिया होगा सब ख़त्म हो गया,
मगर मेरे भीतर अभी अरमान बाकी है।

तू क्या जाने मेरे दिल की गहराई,
अभी तो ख़्वाहिशों की रात बाकी है,
अभी तो तेरे तन में भी
मेरे होने की एक चाह बाकी है।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर