अब कोई तमन्ना नहीं
ख्वाहिशें भी मर गईं,
अब नहीं तमन्ना तुमको पाने की,
जो कुछ था दिल में तुम्हारे लिए,
वो भी थक गया राहें सजाने की।
मेरी जो ख्वाहिशें थीं,
उनका तो दम निकल ही चुका,
अब जो बची हूँ मैं थोड़ी-सी,
उसे ही बाकी रहने दो।
न कोई उम्मीद चाहिए,
न कोई वादा तुम्हारा,
न तुम्हें पाने की चाहत,
न तुम्हारे लौटने का सहारा।
बहुत कुछ खोकर बची हूँ मैं,
अब मुझे यूँ ही रहने दो,
जो कुछ बाकी है मुझमें,
उसे ही बस बाकी रहने दो।
अब नहीं तमन्ना तुमको पाने की,
अब खुद को खोना नहीं है,
जो मर गया तुम्हें चाहने में,
उसके बाद फिर मरना नहीं है।
- रजनी
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