एहसास
वही रहते हैं
अगर,
ये बदल जाते हैं...
थोड़ी और
रहम करो मौला
बेकस पे मल दो
लगन की मृदा
वो हसीन चेहरे...
लाख दुआएं उनको
मुझे घर मिले...
बद्दुआएं, क्यों किसीको?
एक कान से सुनूं
दुसरे कान से निकालूं बात...
बेरहम,
ना बनूं...
अच्छी बातें...
सुने, माने... हयात
थोड़ी सी ज़िंदगी
रहे सुलझी हुई ज़िंदगी
किस काम की दिल्लगी?
आराम दे, सिर्फ़ प्रभु की भक्ति!
बस,
इम्तिहान से हो... आसक्ति...
हस राहुल!
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