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                            चुपचाप
                                                                 
                            
सुनना चाहिए

उनकी बात
समझना चाहिए

बाकी तो,
जो मेरे बस की है...

सबसे महत्वपूर्ण
जो आपकी मर्ज़ी है!

फिर क्यों,
कुछ टोकके बोलना

ज़रा-सी क्यों?

राहुल,
पूरी हार मान जा ना...

तुझे,
बातों में है जीतना क्या?

या,
कर्मों की तब्दीली से...

'सवाल' ही सबके मन से... भुलाना?

दबाव है,
पर, डरने की कोई बात नहीं

दांव हैं,
अपन भी चलने वाले ज़बरदस्त अभी!

चुप्पी, तू,
थोड़े दिन और चुप रह ले?

ज़िद, दोस्त,
एक मैं तेरी ज़िद के ही तो आसरे

बस, रुख कर तू... अच्छी तरफ़ के...

(ना कि उल्टी-सीधी मांग... नर्वस हो के)

दुआ को
शब्द दीजिए प्रभु

धुलवा दो
मन के सभी छोर

और,
मैं क्या मांगूं...

दो-तीन में
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.
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एक घंटा पहले

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