प्रात: प्रकृति का मनोरम दृश्य है सुहाना।
मन को भाता है।पेड़ , पौधों के बीच समय बिताना।
समय का चक्र है बस चलते जाना ।
चलते- चलते एक पौधे ने कहा।
कहो कैसे हुआ आना ।
दूसरा बोला इनका निश्चित थे आना ,
क्योंकि कुछ इनको हमारी थी सुनना
और कुछ था अपनी सुनाना।
समय का चक्र है बस चलते जाना।
थोड़ा बढ़े एक चिड़िया आई
पास में गुनगुनाई और यह बताई ।
कि समय नही रुकता किसी के लिए
जग भवसागर है बस चलते जाना।
समय का चक्र है बस चलते जाना।
हवा की ठंडक भी यह बताती है।
अपना अहसास देकर यह जताती है,
कि शीतलता में ही सबको अपना बनाना ।
समय का चक्र है बस चलते जाना।
देखकर प्रकृति की यह रचना ।
मन हुआ प्रफुल्लित निज उर हुआ मस्ताना।
समय का चक्र है बस चलते जाना।
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