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प्लाट कटते जा रहे हैं।

                
                                                         
                            प्लाट कटते जा रहे हैं,
                                                                 
                            
खेत मिटते जा रहे हैं,
गांव उजड़ते जा रहे हैं, शहर बसते जा रहे हैं।
प्लाट कटते जा रहे हैं...

गांव की दशा बदलते जा रहे हैं,
घर अब मकान बनाते जा रहे हैं,
पेड़ कटते जा रहे हैं, पंछी बेघर होते जा रहे हैं।
प्लाट कटते जा रहे हैं...

रिश्ते-नाते बदलते जा रहे हैं,
इंसान मशीन बनते जा रहे हैं,
दुख-दर्द समझते नहीं, चंद पैसों में सब बिकते जा रहे हैं।
प्लाट कटते जा रहे हैं...

कच्ची पगडंडी के रास्ते, सड़क बनते जा रहे हैं,
लोग एक-दूसरे से कटते जा रहे हैं,
सामने देखकर भी अपराध, चुप रहते हैं,
ईमान-धर्म बेचते जा रहे हैं।
प्लाट कटते जा रहे हैं...

दुनिया बदलते जा रहे हैं,
इंसान आपस में लड़ते जा रहे हैं,
और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) दोस्त बनते जा रहे हैं।
प्लाट कटते जा रहे हैं .....
-राधा चौहान
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50 मिनट पहले

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