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वो फूल सा हसीं चेहरा

                
                                                         
                            वो फूल सा हसीं चेहरा मुझे अच्छा लगा था
                                                                 
                            
किसी रोज उसे देखा था, पर भूल गया था
हाल मेरे दिल का यारों हुआ बुरा
जब आया मेरे सामने फिर वही चेहरा

जुल्फे हैं या बादल, कातिल है उसका काजल
शायर अगर मैं होता उस पर लिखता कोई गजल
लड़की थी वो गजब की जैसे कोई अप्सरा
हाल मेरे दिल का यारों हुआ बुरा
जब या मेरे सामने फिर वही चेहरा

मैं चाहूं मेरे ख्वाबों का फिर से कमल खिल जाए
मैं रब से दुआ करूँ ,वो फिर से कहीं मिल जाए
मेरे हसीं ख्वाबों में रंग उसने ही भरा
हाल मेरे दिल का यारों हुआ बुरा
जब आया मेरे सामने फिर वही चेहरा

किसी का चेहरा दिल में उतर जाता है इस कदर
हर पल हर घड़ी उसी को ही ढूंढे नजर
चैन चुराकर मुझसे ले गया कोई मेरा
हाल मेरे दिल का यारों हुआ बुरा
जब आया मेरे सामने फिर वही चेहरा

वो फूल सा हंसी चेहरा मुझे अच्छा लगा था
किसी रोज उसे देखा था ,पर भूल गया था
हाल मेरे दिल का यारों हुआ बुरा
जब आया मेरे सामने फिर वही चेहरा
-रविन्द्र अमन
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46 minutes ago

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