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मुझको तो ठोकर लगी हर ठोकर के बाद

                
                                                         
                            चैन, सुकून की जिंदगी जीने वालों को मेरा मुबारकबाद
                                                                 
                            
मुझको तो ठोकर लगी हर ठोकर के बाद

ग़ैरों से दर्द कम मिला, दर्द मिला मुझको अपनों से
गम ने तो हमेशा गले लगाया, हमको रुलाया हसीं सपनों ने

मुझको यहां सबसे करना पड़ा समझौता
मेरा बाग-ए - ठिकाना चील कौवों से भरा था
मैं अकेला था तोता

अब दर्दे दिल का आलम मत पूछो ,
कम है या ज्यादा
जब कहीं कुछ नहीं मिला तो,
हमने दर्द को ही बना लिया दवा

मैं हर बार ठगा जाता हूं ,
कुछ मेरा ऐसा है उसूल
जब कटों से चुभन मिलती है तो ,
मुझपे हंसता है फूल

कभी तो कुछ अच्छा होगा,
इसी उम्मीद से जिये जा रहा हूं
हर पल हर घड़ी मैं जहर पिए जा रहा हूं

चाहे जितना सितम हुआ ,
हम हुए ना बर्बाद
मुझको तो ठोकर लगी, हर ठोकर के बाद
-रविन्द्र अमन
 
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37 मिनट पहले

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