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बदलेगा जमाना

                
                                                         
                            किसी मजबूर लाचार को मै जब देखता हूं
                                                                 
                            
मैं खुद को मजबूर लाचार सोचता हूं

वह चाहे जो है,हिंदू है, मुस्लिम है, सिख है ईसाई है
एक इंसान होने के नाते,सबसे पहले मेरा भाई है

कोई चाहे जितना बड़ा हो , पहुंचा हो बहुत ऊपर
जो किसी का दर्द ना समझे,वह आदमी नहीं है, है जानवर

कुछ नहीं है अपने पास,इस बात का है गम
कुछ करने का इरादा है,यह जज्बा क्या है कम

पल में घबड़ाने की बुरी है अपनी आदत
कयामत भी रुक जाएगी,अगर रखोगे तुम हिम्मत

लोभ - लालच के पीछे यारों तुम मत भागना
मैं सच्च कहता हूं देखना
एक दिन बदलेगा जमाना
मैं सच्च कहता हूं देखना
एक दिन बदलेगा जमाना
-रविन्द्र अमन 
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7 घंटे पहले

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