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उड़ा डाले वसन

                
                                                         
                            हे पवन मेरे मित्र ,
                                                                 
                            
कितने निष्ठुर ,
कितने धृष्ट बन गए हैं आप
उड़ा डाले वसन
और उड़ा डाली छत ,
घनिष्ठता हुयी थी हमारी, उस दिन
और दिन ढले ,कैसा ये परिवर्तन !
अरे-अरे सुनिए , परिवर्तन है सत्य
आप नहीं बदले क्या ?
आश्चर्य, विपदा, क्या क्या
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एक घंटा पहले

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