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एक नाव पर बैठा हूँ मैं

                
                                                         
                            एक नाव पर बैठा हूँ मैं
                                                                 
                            
एक नाव पर बैठा हूँ मैं
केवट पतवार का सहारा है
लकड़ी का नाव, कुछ पुराना है
मैं भी कौन सा नया हूँ?
एक नाव पर बैठा हूँ मैं …..

नदी की तेज या सुस्त धार में
केवट के अनुभव का क़ायल मैं
वह कहता,मैं सबको पार लगाता हूँ
चाहे किनारा दूर हो या नज़दीक।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….

भँवर में भी फँस जाये अगर
धार की दिशा समझता वही
पतवार है शक्ति ,बीच नदी में
विश्वास बहुत है केवट पर।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….

नाव तो मेरा जीवन है
केवट है परमात्मा मेरा
पतवार है उपासना उसकी
भवसागर पार उतारेगा।
एक नाव पर बैठा हूँ मैं ….
-प्रेम वर्मा
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36 मिनट पहले

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