करूंगा जब भी फैसला आपके फितरत का दर्द छुपा पाऊंगा मैं नहीं बढ़ा कर गम कुछ और सच सारा तुम्हें बता जाऊंगा
मेरी नादानी मेरी महरूमी ने दिया दर्द हमें ही बहुत राह ए वफा देकर तुम्हें इम्तिहान अपना दर्द ए वफा मैं सुना जाऊंगा
जानता हूं बढ़ा कर तुम बेरुखी दर्द कुछ और मेरा बढ़ा जाओगे सीख के जीना घुट घुट कर बेचैन दिल मैं सता जाऊंगा
मिले हो इस बार करके इक अहसान मुझ पर होकर सामने तेरे बुझा कर दिया आस का दर्द सारा मैं अब सुना जाऊंगा
लाकर दिल में आपको चैन ओ सकूं खोना पड़ा है और सुना के तुम वादे हजार करके हमें मायूस खुशियां मिटा जाओगे
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