हमें तुम कभी दर ब दर न करके आजमा लिया करो मैं कोई बेवफा नहीं अपने दिल को समझा दिया करो
है तेरे सख्त निगाह में फरेब समझा करो जखीरा नफरतों का पाल रखा हैं लाकर एहसास सोच लिया करो
कहना तो बहुत कुछ मगर कह नहीं सकता मुझ पर कुछ भी इल्जाम लगाने से पहले तुम सोच लिया करो
अंदाज तेरा दिल लगा कर दिल तोड़ना कुछ तो सब्र करो ऐ दिल ए ख्वाब दर्द हमें इस तरह न दिया करो
हालांकि हंसी खुशी दर्द जताया मैने तुम्हें मगर शाम आई तो यादों मे बेकरार हमें इस तरह न किया करो
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X