प्रकृति ने न कोई भेद किया,न कोई जंगल बांटा है।
वायु ने सबको प्राण दिए,न किसी का रस्ता कांटा है।
न ऊँचा कोई जन्म यहां, न कोई खून निराला है,
जाति-जाति करने वालों ने, ये कैसा भ्रम पाला है।
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