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किस बात का अभिमान

                
                                                         
                            झूठी बातों को जोर से कहना,
                                                                 
                            
दोहराना बारम्बार,
उस से अच्छा हैं चुप ही रहना,
न विवाद न प्यार.

छल कारित से साजिश रचना,
जीतना है हरबार.
उस से बेहतर हार मान लेना,
क्यों झूठी तकरार.

दूसरों को सदा मूर्ख समझना,
नहीं ज्ञान का पहचान.
बात बात पर लड़ना झगड़ना,
नहीं वीरों की शान.

चलने के लिए सन्मार्ग को चुनना,
कहलायें वो विद्वान,
प्रेम भाव से हैं सभी से मिलना,
किस बात का अभिमान.

- पी. के. मंडल
 
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4 वर्ष पहले

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