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बाहोश को सुनाओ क़ल्बाना ज़िन्दगी का

                
                                                         
                            मयख़ाने में न पूछो अफ़्शाना ज़िन्दगी का
                                                                 
                            
बाहोश को सुनाओ क़ल्बाना ज़िन्दगी का

दिल में स्यिह तेरे और तन पे है राम नामी
रोशन भला हो कैसे काशाना ज़िन्दगी का

क़ौल-ओ-करार करके मानुष जनम गंवाया
जन्मो जनम भरेगा हर्ज़ाना ज़िन्दगी का

मयकश से पूछते हो उसका इरादा क्या है
ला हाथ में थमा अब पैमाना ज़िन्दगी का

दुनिया जहान से अब हमको न वास्ता कुछ
अलमस्त है फ़क़ीरा शुकराना ज़िन्दगी का

विश्वास पर टिकी है रिश्तों की डोर यारो
उलझे तो फिर है मुश्किल सुलझाना ज़िन्दगी का

हाथों में 'दीप' लेके घूमें तेरी गली में
कोई हसीन दे दे नज़राना ज़िन्दगी का
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
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एक घंटा पहले

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