आजकल लोग
हर किसी के बारे में
सोचकर यह
मन ही मन करते हैं
तिरस्कार उसका
कि दे रहा है
उपदेश हमें
जबकि बाज़ दफा
होता यह है
कि हर व्यक्ति उपदेशक नहीं
जबकि कर रहा होता है
मार्गदर्शन हमारा
अगर कोई कहता है आपसे
कि जिस रास्ते पर चल रहे हैं
आप
उस मार्ग में आगे हैं
गढ्ढे और कांटे
तो वह आपको उपदेश न देकर
केवल चेता रहा है
आपको
इसलिए देना चाहिए ध्यान
किसी व्यक्ति की बात पर
और चाहिए यह सोचना
कि वह उपदेशक न होकर
हो सकता है आपका
मार्गदर्शक भी।
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