सरगम के तारों में
बंधा राग
सीख कर उस्तादों से
और करअभ्यास अपना निरंतर
छोड़ता है जब कोई फनकार
सुरों के पंछी
तो उनकी मीठी तान
घोलती श्रोताओं कानों में
रस की मिठास
भरती उनके दिलों में
एक अद्भुत सुकून
जिससे बेसाख्ता कर उठते
वे वाह, वाह
बजती फिर ज़ोर-ज़ोर से तालियां
फनकार की सुरों की
अदायगी की
सराहना में
गूंजता है स्वर फ़िज़ां में
'वन्स मोर-वन्स मोर' का
सचमुच,बंधता क्या समां
चारों ओर।
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