आजकल जिसे देखिए
मिल जाता है वही शख्स
कहता हुआ यह
में तो हूं सुधरा हुआ ही
आप सुधर जाइए
इसलिए इस सुधरी हुई]
दुनिया में
बात सुधार की करना
है एकदम बेमानी
असल में
जीवन में पकड़ना
सही रास्ता
ही है
सुधार की निशानी
इसलिए चलते जाइए आप
सही रास्ते
मानकर यह
कि है यह संसार
सबके वास्ते।
-डॉ. प्रदीप कुमार मुख़र्जी
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