देवभूमि में बादल फट रहे फटाफट,
उत्तराखंड हो रहा है खंड-खंड,
हिमाचल का अंचल हो रहा आहत,
क्यों देवता दे रहे हैं कष्ट,
क्यों रुष्ट हैं इतना सतत?
प्रकृति का बरस रहा प्रकोप,
गांव-गांव हो रहे हैं लोप।
न धुआँ, न प्रदूषण, न बड़ा शहर,
फिर क्यों बरस रहा है यहाँ कहर?
विज्ञान ने की अद्भुत प्रगति,
आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटर, क्वांटम की शक्ति,
फिर भी न समझ सका प्रकृति की मति।
अध्यात्म है बेबस, विज्ञान है लाचार,
देवभूमि सह रही है प्रकृति की मार।
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