तुम्हारे पहलू में आकर हमने
कितने ही ग़मों को यूँ मात दी है,
हमें यक़ीन है — तुम्हें भी हमसे
मोहब्बत कुछ इस क़दर है,
जैसे ख़ुशबू कोई
गुलिस्ताँ से बिखर रही है।
तुम्हारे बिन हमसफ़र
न कटता है एक पल भी,
तुम्हारे बिन तो मानो
राहें भी ठहर गई हैं।
मगर मिलो तुम अगर सच में,
तो किस्मत भी मुस्कुरा उठेगी,
सूनी सी ये ज़िंदगी मेरी
रोशनी से भर उठेगी।
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