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इंजीनियर स्वैग

                
                                                         
                            कोई किसी से कम नहीं,
                                                                 
                            
हमको रोक सके – किसी में वो दम नहीं।
ये अंदाज़, ये स्वैग है हमारा,
सीने में धधकता जिगर है हमारा।
सबकी अपनी-अपनी रफ़्तार है,
हर कोई अपने हुनर का धुरंधर है,
परिस्थितियों से क्या डरना हमें,
हौसलों का अपना ही समंदर है।
समंदर की लहरों पर सोते हैं हम,
तूफ़ानों से भी खेलते हैं हम।
ना रुकना सीखा, ना झुकना सीखा,
हर बाधा को चीर निकलते हैं हम।
मेहनत से रोज़ नए फूल खिलाते,
सपनों को हक़ीक़त में ढालते जाते।
चुस्त-दुरुस्त, हरदम तत्पर,
गलतियों से सीखकर आगे बढ़ जाते।
हम इंजीनियर हैं – जुनून हमारी पहचान,
हर क्षेत्र में दमखम, हर मंच पर मान।
हर नज़्म, हर इल्म में रखते हैं क्रेज,
इसलिए हर महफ़िल की शान और स्वैग हैं हम आज।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

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