आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

समाज पर संकट का काला बादल

                
                                                         
                            मातृभाषा पोवारी पर
                                                                 
                            
पवारी नाव थोप रहया सेव।
कर्णधारों! मातृभाषा पोवारी की,
बढ़ती बेल तुम्हीं मुरकट रहया सेव।।

पोवारी संस्कृति पर
पवारी नाव थोप रहया सेव।
कर्णधारों!पोवारी संस्कृति की,
बढ़ती बेल तुम्हीं मुरकट रहया सेव।।

पोवार समाज पर
पवार नाव थोप रहया सेव।
कर्णधारों! पोवार समाज की,
बढ़ती बेल तुम्हीं मुरकट रहया सेव।।

पोवार समाज की
ऐतिहासिक पहचान बदल रहया सेव।
कर्णधारों!पोवार समाज की,
पोवारी अस्मिता ला कुचल रहया सेव।।

दूय तीन जातियों ला
एक मा तुम्हीं मिलाय रहया सेव।
कर्णधारों!तुम्हीं समाज को,
स्वतंत्र अस्तित्व मिटाय रहया सेव।।

अंतर्जातीय विवाह कर
तुम्हीं धीरु- धीरु आगे बढ़ रहया सेव।
कर्णधारों!पोवार समाज को,
ऐतिहासिक अस्तित्व मिटाय रहया सेव।।

प्रिय स्वजनों उठों जागो
कर्णधारों की साज़िश तुम्हीं पहचान लेव।
षड़यंत्रों को खिलाफ,
संघर्ष करके समाज को अस्तित्व बचाय लेव।।

-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
20 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर