सावन को महिना मा
रिमझिम बरसात बरस रहीं से।
धरा पर हरियाली,
यौवना वानी सज संवर गयी से।।
सावन को महिना
धुआं धार बरसात बरस रहीं से।
हर नदी नाला,
पूरों उमंग उत्साह लक बह रही से।।
सावन को महिना मा
गगन मा गड़गड़ाहट होय रही से।
भारतवर्ष मा,
किसानी उत्साह लक गड़ रहीं से।।
सावन को महिना मा
वसुंधरा पर थंड़ी हवा बह रही से।
गरीबों की झोपड़ी मा,
छपरी मा लक पानी टपक रही से।।
सावन को महिना मा
वसुंधरा ला जवानी चढ़ गयी से।
किसान मजदूर,
चिखल मा संभलकर चल रही से।।
सावन को महिना मा
पशुधन ला गवत मिल रही से ।
धूरा- पारी मा चरके,
पशुधन परम् संतुष्टि पाय रहीं से।।
सावन को महिना मा
त्यौहारों को सुहानो समय आयी से।
घर को बाल गोपालों ला,
सावन को महिना मा उमंग छायी से।।
सावन को महिना मा
भोलेनाथ की भक्ति मोठी फलदाई से।
भोलेनाथ की भक्ति,
मंगलमय परम् पावन अना सुखदाई से।।
-ओ सी पटले
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