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नवयुवकों में नशा

                
                                                         
                            ये भटका हुआ किशोर है
                                                                 
                            
लगता मदिरा का जोर है
बिखरे-बिखरे बाल हैं
लड़खड़ाती सी चाल है

ये चला आ रहा है कौन ?
बतलाओ क्यों चुप हो मौन?
बातें हैं बड़ी-बड़ी
आंखें कुछ चढ़ी-चढ़ी
रात बीती दो घड़ी
सेज पर प्रिया पड़ी
नींद है उड़ी-उड़ी
चौखट पर मां खड़ी
कि इंतजार है,
किशोर की स्वयं से हार है।

बेकार सी ये लत
आदत है गलत,
अवनति की ओर क्यों बढ़ें?
सोपान क्यों न उन्नति के गढ़ें?
-पूनम सिंह
 
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एक महीने पहले

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