कर आतंकी हमले तुमने,फिर से हमें ललकारा है!
तुमने सोते हुए शेर को ,उसकी गुफा से पुकारा है!
धोखे से मार देश के जवानों को?
अपनी कायरता दिखाई है,
तुमने पुलवामा में बम विस्फोट कर !
खुद की चिता सजाई है !
गिन लो अपनी जिंदगी के चंद दिन,
क्योंकि मौत तुम्हारी अब आई है !
अब चंद्र ग्रहण लग तुम पर काली घटा छाई है,
कर आतंकी हमले तुमने ,फिर से हमें ललकारा है! तुमने सोते हुए शेर को ,उसकी गुफा से पुकारा है !
इस बार ना कोई कैंडल मार्च होगा ,
ना ही खून माफ होगा ,
चुन-चुन के अब मारेंगे हर आतंकी को ,
अब तो बस इंसाफ होगा !
वैलेंटाइन डे के दिन तुमने ,अपना भद्दा रूप दिखाया है,!
पुुलवामा पर धोखे से कर वार तुमने ,
अपनी कायरता का परचम लहराया है!
बच लो अब जितना बच पाओ,
घुस जाओ अपनी बील में अगर घुस पाओ!
नभ जल थल से खोज तुमको बेरहमी से मारेंगे ,
तुमने तो चुपके से मारा था हम तो सामने से कलेजा तुम्हारा चिरेंगें!
अब ना तुम आतंकी बचोगे ,
न हीं होगा कोई तुम्हारे साथ!
क्योंकि बहुत बर्दाश्त कर चुका हिंदुस्तान,
अब उठेगा इसका हाथ !
अब सीने से धड. अलग तुम्हारा
होगा,
जो आग तुमने सीने में लगाई,
उसका बदला पूरा होगा!
खत्म हुआ अब बर्दाश्त ,
अब करेंगे तुम को परास्त !
मारकर तुमको भी जवानों को मुक्ति दिलवाएंगे, छलनी कर तुम्हारा सीना,
कश्मीर की धरती पर तिरंगा फहराएंगे !
अब हर मजहब से ऊंचा इंसान होगा ,
मिटा हर आतंकी और मिटा उसका निशान होगा ,
कर आतंकी हमले तुमने फिर से हमें ललकारा है, तुमने सोते हुए शेर को उसकी गुफा से पुकारा है!
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