चलो, आज इतिहास बताते हैं,
बीते युग की बात बताते हैं।
कैसा था भारत आजादी से पहले,
वीरों की सौगात बताते हैं॥
अंग्रेजी शासन था अत्याचारी,
जनता पर भारी थी लाचारी।
खेत हमारे, अन्न हमारा—
फिर भी भूखी थी दुनिया सारी॥
हल किसान का चलता जाता,
खून-पसीना मिट्टी खाता।
फसल उगाकर कर चुकाता,
फिर भी पेट न भर पाता॥
करघे पर जो स्वप्न बुनाता,
भारत का गौरव बढ़ाता।
विदेशी माल की चोट पड़ी तो
कारीगर अपना हुनर गँवाता॥
नील की खेती का फरमान,
किसान हुआ बेबस-हलाकान।
जुल्म, लगान और बेगारी—
हर ओर था शोषण का विधान॥
पर भारत की माटी ऐसी,
हार मानना जाने न वैसी।
चिंगारी जब दिल में भड़की,
ज्वाला बन गई वही चिंगारी॥
मंगल पांडे ने शंख बजाया,
अट्ठारह सौ सत्तावन आया।
झाँसी की रानी रण में उतरी,
वीरों ने इतिहास बनाया॥
कुँवर सिंह की तलवार गरजी,
वीरता की गाथा बरसी।
दिल्ली से लेकर गाँव-गाँव तक,
स्वाधीनता की मशाल जली॥
फिर तिलक ने हुंकार लगाई,
स्वराज की ज्योति जगाई।
गांधी ने सत्याग्रह लेकर
जन-जन में चेतना जगाई॥
नमक उठा तो राज हिला,
चरखा चला तो ताज हिला।
सत्य-अहिंसा की शक्ति से
साम्राज्य का सिंहासन हिला॥
कहीं जेल की काल कोठरी,
कहीं लाठी, गोली, फाँसी।
फिर भी भारत माँ के बेटों ने
कहा—न होगी अब गुलामी॥
भगत सिंह की गूँजी हुंकार,
आजाद की अडिग ललकार।
सुभाष की सेना बढ़ती गई—
काँप उठा अंग्रेजी दरबार॥
न जाने कितने दीप बुझे,
न जाने कितने शीश कटे।
कितनी माताओं की गोदें सूनी,
कितने सपने रण में मिटे॥
उन अनगिनत बलिदानों से
स्वतंत्र हुआ यह देश हमारा।
पंद्रह अगस्त की भोर ने फिर
रचा नया इतिहास हमारा॥
यह आजादी दान नहीं है,
यह कोई उपकार नहीं है।
रक्त-रंजित बलिदानों से
मिला हमें अधिकार यही है॥
इसलिए जब तिरंगा देखो,
मन में एक सवाल जगाओ—
जिन वीरों ने देश बचाया,
क्या उनका ऋण चुका पाओ?
इतिहास पढ़ो, इतिहास समझो,
अपने पूर्वजों को पहचानो।
स्वतंत्रता का मोल समझकर
भारत का सम्मान बढ़ाओ॥
चलो, आज फिर शपथ उठाएँ,
भारत को ऊँचा ले जाएँ।
जिन वीरों ने प्राण दिए थे,
उनके सपनों का देश बनाएँ॥
माटी बोले—वीर न भूलो,
गंगा बोले—पीर न भूलो।
तिरंगा जब नभ में लहराए,
भारत का इतिहास न भूलो॥
वंदे मातरम् की गूँज रहे,
भारत माँ की जय-जयकार।
वीरों के बलिदान से पावन—
अपना भारत, अपना संसार॥
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