बुजुर्गों की दुआओं का ये सरमाया, बहुत है
हो सर पर माँ का आँचल तो वो इक छाया, बहुत है
खरीदें दोस्ती, चाहत, वफ़ा को कैसे कोई
किसी ने दिल से अपना मान अपनाया, बहुत है
अधिक ख़्वाहिश नहीं जितना मिला उसमें ही खुश हैं
जहां में इज़्ज़त-ओ-तौक़ीर को पाया, बहुत है
तमन्ना भी नहीं है दौलत-ओ-शोहरत की दिल में
निवाला चैन का थाली में है आया, बहुत है
शफीकी से सदा मेरा चमन महका रहेगा
ख़ुदा ने मेरा ये किरदार महकाया, बहुत है
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