आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मोहब्बत हमारी सलामत रहे

                
                                                         
                            मोहब्बत हमारी सलामत रहे
                                                                 
                            
सदा दिल में बन तू अमानत रहे

तू ने प्यार से अपने जीता है दिल
मेरे दिल पे तेरी हुकूमत रहे

मुझे दिल में अपने बिठाया तू ने
तेरा इश्क़ बन के शरारत रहे

ख़ुशी अपनी है इश्क़ के दम से ही
न अब ज़िंदगी से अदावत रहे

तिरे नाम 'पारुल' का दिल है सनम
जहाँ तुम वहीं मेरी जन्नत रहे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
17 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर