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लकीरों में नहीं ये साथ

                
                                                         
                            अब नहीं दिल नाम से तेरे, धड़कता कैसे कह दूँ
                                                                 
                            
यादों में तेरी नहीं अब दिल ये, जलता कैसे कह दूँ

आसमाँ में चाँद-तारे भी, सो जाते वक़्त के साथ
अश्कों से दिल ये नहीं, तहरीरें लिखता कैसे कह दूँ

होठों पर मुस्कान, आँसू आँखों में रहते हैं मेरी
नाम से दिल में नहीं, शोला भड़कता कैसे कह दूँ

सीने पर पत्थर को रखकर, ज़िंदा ख़ुद को रक्खा हमने
मोम जैसा दिल नहीं मेरा, पिघलता कैसे कह दूँ

इन लकीरों में नहीं ये साथ अपना होगा 'पारुल'
प्याला आँखों का नहीं, अब तो छलकता कैसे कह दूँ
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57 मिनट पहले

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