नफरतें दिल से निकाल कर सबको बाँटो ख़ुशियों की सौगात
गले लगा कर अपने -पराए सबको प्यार की कर दो बरसात
सेंवई की जैसी मिठास घोल कर बोलो में ,मीठे बनाओ रिश्ते
छोटे-बड़े सब की गलतियों को भूलकर करो सबसे मुलाक़ात
बड़े बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लेकर कर लो अपना मुकद्दर बुलंद,
बड़े बुजुर्गों के क़दमों में ये सिर झुकाने से पूरी होगी मुनाजात
बाँटने से बढ़ते हैं सुख तो दुखों का बोझ हो जाता है थोड़ा कम
अपने ग़म को भूल कर दूर करो किसी की ज़िंदगी के ज़ुल्मात
दुआएं बटोर लो दामन में मुरझाए चेहरों पे खिलाकर तबस्सुम
अमीरी-गरीबी, धर्म-मज़हब के आने ही मत दो बीच में हालात
मुफ़लिसों, मज़लूमों की सेवा ही तो है सच्ची इबादत 'पारुल',
ईद के दिन दुआ करें ख़ुदा के बाशिंदों को मिले ग़मों से नजात
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