हम हैं मौजूद तेरे दिल की सनम धड़कन में
ज़िंदगी भर को रहेंगे तेरे घर-आँगन में
आओ अब तुम ले के बारात पिया घर मेरे
माँग भर कर मेरी बाँधो मुझे तुम बंधन में
अब जिया मेरा भी लगता नहीं है बिन तेरे
भीगना चाहूँ तेरे प्यार के इस सावन में
कुछ भी अच्छा नहीं लगता बिना तेरे प्रीतम
रहना है अब मुझे अपने ही सजन के मन में
बन के दुल्हन तेरे जब द्वार पिया मैं आऊँ
प्यार भर देना मेरे छोटे से इस दामन में
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X