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दिल के क़रीब हो

                
                                                         
                            तुम दूर रहके, दिल के मेरे तो क़रीब हो
                                                                 
                            
माना है तुमको अपना, मेरे तुम हबीब हो

हैं दरमियाँ ये फ़ासले, तो क्या हुआ सनम
समझो के बन गए मेरा, तुम अब नसीब हो

दिल को क़रार आता है, तुमसे ही मिल के अब
मर्ज़-ए-दवा हो तुम मेरे,  तुम ही तबीब हो

ये ज़िंदगी तू ने की मुकम्मल, मेरे सनम
जीना भी सीखा तुमसे, मेरे तुम अदीब हो

जन्मों का अपना नाता, ज़रा पूछो दिल से तुम
तुम प्यार को समझते नहीं,  तुम अजीब हो
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एक घंटा पहले

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