मीठी सेवइयों सी मिठास हो जीवन में कड़वाहट का नाम-ओ-निशाँ न हो
दीदा-ओ-दिल में हो रिफ़ाकत, अदावत का दूर-दूर तक कहीं धुआँ न हो
इख़्तिलाफ़त हटाकर आओ ईद मिलें हम सब भी आपस में भाईचारे से
दिल में न रहें नफ़रतें, दुश्मन के लिए भी तल्ख़ कभी हमारी ज़ुबाँ न हो
ख़ुदा की रहमतों से ईद का इतना पाक व मुबारक दिन है आज आया
हर रुत नज़र आए ईद की रुत किसी के लिए मौसम-ए-ख़िज़ाँ न हो
मोहब्बत के गुलों से महकता रहे बाग़-ए-ज़ीस्त हर अपने -पराए का
तबस्सुम ही खिले सबके रुख़सार पर दर्द-ओ-अलम दिल में निहाँ न हो
अम्न-ओ-चैन का आलम ही नज़र आए हर सम्त पूरे जहां में 'पारुल'
अफ़्सुर्दा न हो कोई भी चेहरा किसी का जहां आशोब-ए-जहाँ न हो
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