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मेरी सुबह खिल उठती है

                
                                                         
                            अपने गमलों को हरा भरा देख
                                                                 
                            
मन को एक अलग ही खुशी मिलती है
नए पौधों को धीरे धीरे बढ़ते देखना
नन्हीं नन्हीं कोंपलों का फूटना
मुलायम कोमल नन्हीं नन्हीं सी पत्तियों का निकलना
फिर हष्ट पुष्ट पौधों में बदलना
उनपर छोटी छोटी कलियों का आना
और फिर सुंदर फूलों का खिलना
एक आम सी प्रकिया लगती है
पर जब कली धीरे धीरे पंखुड़ियां खोलती है
और एक सुंदर से फूल में परिवर्तित होती है
ये नजारा देख वाकई एक बहुत ही अलग अनुभूति होती है
कैसे प्रकृति हरदम नई सृजनता में जुटी रहती है
हर सुबह नई पत्तियों कलियों फूलों को खिलता देख
मन प्रफुल्लित हो उठता है
अपने गमलों को हरा भरा देख
वाकई...……………………मेरी तो सुबह खिल उठती है
 -सरिता सिंह
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11 महीने पहले

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