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तख़्ते पलटेंगे जब, मंज़र ख़राब हो

                
                                                         
                            कुर्सी के गुरूर में जो रौंदते हैं हक़ सबका,
                                                                 
                            
तख़्ते पलटेंगे जब, मंज़र ख़राब होगा।
सरकार तुम्हारी है, नशे में चूर हो तुम,
कल दौर बदलेगा तो सबका हिसाब होगा।
— पंकज साहनी
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2 महीने पहले

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