जो गुजरी है मुझ पर,
उसकी कहानी बन गई,
मुख्य अदाकार तो एक है,
कई विलेनों की...,
जमात इकट्ठी हो गई।
करते हैं जब एक साथ हमला,
मेरी सिट्टी पिट्टी गुम हो गई।
मेरा इरादा कुछ भी न था,
पर फिर भी उनकी हेकड़ी निकल गई।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X