मिट्टी के पुतले,
बन जाएगी एक दिन राख,
क्या खोया क्या पाया?
बस रह जाएंगी यही बात।
क्यों करता है तेरा मेरा?
कुछ नहीं लगेगा हाथ,
यमराज लगाए बैठा घात।
जिंदगी का कुछ पता नहीं,
कब दे दे मात?
-चंद्र दत्त शर्मा
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