दिलों से दिलों की आवाज मिलाते रहिए,
प्रेम से एक दूजे के हाल जानते रहिए।
अब तो जो भी होगा सब प्रेम पूर्वक होगा,
सबकी खबर स्वयं जा जाकर लेते रहिए।
मिटाकर सब ईर्ष्या द्वेष जैसे भावों को,
साथ साथ चलने की कोशिश करते रहिए।
राहों में कभी कोई मिल जाए दिन दुखी,
उनके कष्टों का मिल निवारण करते रहिए।
सब जन सुखाय और सब जन हिताय,
इस नीति पर दृढ़ता पूर्वक चलते रहिए।
-चंद्र दत्त शर्मा
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