इस आज़ाद आसमान में एक क़ैद
शख़्सियत हूँ मैं,
मुझसे ना उलझना,
एक जीती-जागती अज़ियत हूँ मैं।
तुम क्या समझाओगे मुझे दुनिया की ये
रवायतें, इन्हीं रस्मों से उपजी,
एक मुकम्मल बग़ावत हूँ मैं....।
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