जब-जब सावन में राखी का त्योहार आता है,
बचपन का वह प्यारा सावन याद आता है।
प्रेम और स्नेह का यह बंधन
मन को अतीत में ले जाता है,
भूली-बिसरी यादों का सागर
आँखों में फिर लहराता है।
मायके के आँगन का वह त्योहार
कितना निराला था,
रेशम के धागों से सजी
चंदन-कुमकुम की थाली थी।
भाई की कलाई पर राखी सजाकर
मन खुशी से झूम जाता था,
बहन के स्नेह भरे स्पर्श से
हर रिश्ता और भी खिल जाता था।
भगवान करे कि हर बरस
यह राखी का त्योहार आए,
भाई-बहन का यह अमर प्रेम
हर घर में फिर से नई दीप जलाए।
— नूतन झा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X