चाँद की चाँदनी को एक दुपट्टे ने छुपा रखा है
यही मुनाफ़िक़ की इन दो आँखों ने हमें बचा रखा है
जो कहना होता है ज़रूरी वो भी इशारों में कह गई वो
यहाँ लोगों ने बेवजह बातों का शोर मचा रखा है
अभी ये बात अपनी सहेली से भी न कही होगी उसने
हमने यहाँ मोहल्ले के एक-एक बच्चे को नचा रखा है
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