आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चाँद की चाँदनी को एक दुपट्टे ने छुपा रखा है

                
                                                         
                            चाँद की चाँदनी को एक दुपट्टे ने छुपा रखा है
                                                                 
                            
यही मुनाफ़िक़ की इन दो आँखों ने हमें बचा रखा है

जो कहना होता है ज़रूरी वो भी इशारों में कह गई वो
यहाँ लोगों ने बेवजह बातों का शोर मचा रखा है

अभी ये बात अपनी सहेली से भी न कही होगी उसने
हमने यहाँ मोहल्ले के एक-एक बच्चे को नचा रखा है

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर