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खुद को हार कर

                
                                                         
                            खुद को हार कर तुम्हारे हुए हैं
                                                                 
                            
ये रोग भी खुद ही पाले हुए हैं

अजनबी सी लगती है जिंदगी
और अपने भी पराये हुए हैं

जिधर ले जाती है चल पड़ते हैं
तकदीर, हम तेरे सहारे हुए हैं

इश्क एक जुआ है मेरे दोस्त!
और हम जुएं में हारे हुए हैं

आओ देखो और फिर चले जाना
मेरी बर्बादी में कितने आये हुए हैं

ये जो चुप-चाप बैठे हैं महफिल में
किसी ना किसी के सताये हुए हैं

बस एकाध पागल को छोड़ कर
तुम्हारे कायल ये सारे हुए हैं

 
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2 वर्ष पहले

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