कविता : मोबाइल की गड़बड़ी..
जिसका कोई नहीं होता
उसका मोबाइल है पास में
दुनियादार छोड़ छाड़
उसका सिर्फ वही है खास में
जब मोबाइल हो खास, वो
नहीं होता किसी का
आज कल का रोड़ा है
बास सिर्फ इसी का
आज कल का रोड़ा है
बास सिर्फ इसी का.......
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